Tuesday, September 9, 2008

विष्फोटक रसायन

धर्म यानि मजहब
एक विष्फोटक रसायन
अति संवेदनशील , जरा सी हुई ढील
और दग गया।
फ़ैल गया बारूद , शहर में गाँव में
बागों की छाँव में
गली में फुटपाथ पर
जाने किस बात पर
न कोई डिटोनेटर , न कोई चिंगारी ,
बस किसी के दिमाग की खुजली
पड़ गई सब पर भारी ,
बिगडैल बच्चा कोई ,
ध्यान सबका खींचने को ,
पटक देता हाथ में पकड़ा खिलौना ,
रोता और चिल्लाता ,
पूंछने पर , किसी की ओर करके इशारा
आरोपित करता ज्यों उसने ही तोडा हो।
लोग सत्य जान कर भी ,
मान लेते बात बच्चे की ,
कि उसका चिल्लाना बंद हो।
एक चपत हलकी सी ,
सचमुच या झूठी सी ,
लगा दी आरोपी को ,
बालक संतुष्ट हुआ।
यही बच्चा बढ़ते - बढ़ते ,
बढ़ गया।
धर्म पर सीधी लगा कर,
चढ़ गया।
अज भी वह ट्रिक है उसके साथ ,
और लंबे आज उसके हाथ।
वह कहीं आचार्य धर्मों का ,
कहीं नेता ,कहीं आलिम ,
कहीं तालिब , कहीं मुंसिफ ,
कहीं वह शीर्ष सत्ता का।
वह खड़ा है जिस ऊंचाई पर ,
कि उसका एक इशारा ,
कुन्तलों बारूद को शोला बना दे ,
वो जब चाहे शहर को शहर रहने दे ,
जब चाहे श्मशान बना दे।




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